
चीन के राष्ट्रपति सी जिनपिंग 01सितमबर से 04 सितमबर तक मिस्र की यात्रा पर थे। मिश्र मे पहुचते ही उनका भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद 02 सितमबर को मिस्र के नेताओ से बातचीत व द्विपक्षीय समझोते किए गए। 03 सितमबर को सी जीनपिंग मिस्र के सांस्कृतिक व ईकोनोमिक साइट के साथ साथ, Grand Egyptian Museum मे भ्रमण किया। 04 सितमबर को सी जिनपिंग चीन के लिए रवाना हुए।
चीन की मिस्र यात्रा पर विश्व की नजर क्यू है-
इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी मिस्र की यात्रा पर थे तो कही न कही दुनिया के दो बड़े नेताओ का एक के बाद एक मिश्र की यात्रा करने के बहुत सारे मतलब निकाले जा सकते है। ओर साथ ही दुनिया के दो बड़े देशों का मिस्र जैसे राष्ट्र को अचानक से इतना महत्व देना दुनिया को रास नहीं आ रहा है।
इस बात के अनेक कारण हो सकते है क्यूकी मिस्र स्वेज नहर पर अपना नियंत्रण रखता है स्वेज नहर वही है जो भूमध्य सागर को लाल सागर से जोड़ती है ओर स्वेज नहर से दुनिया का 15 प्रतिसत समुद्री व्यापर नियंत्रित होता है जब से अमेरिका के द्वारा ईरान पर हमला किया गया ओर ईरान के द्वारा स्ट्रैट ऑफ हारमुज पर कंट्रोल किया गया तब से स्वेज नहर का महत्व ओर बड़ गया है

मिस्र एक मुस्लिम बाहुल्य राष्ट्र है जो की इस्राइल के साथ बॉर्डर साझा करता है फिर भी अमेरिका , मिस्र को 1.5 बिलियन की सेनीय सहायता देता है। कही न कही यह दोनों देश अपने व्यापार को बड़ाने के लिए व स्वेज नहर पर अपना अधिकार करने के लिए कुछ रणनीति बना रहे है। चीन मिस्र के साथ Trade Surplus मे रहता है। (Trade surplus का अर्थ है जब चीन व मिस्र के बीच व्यापार होता है तो उसमे चीन को फायदा होता है या इसको एसा समझा जा सकता है की चीन मिस्र को अपना ज्यादा सामान बेचता है व मिस्र, चीन को अपना कम सामान बेचता है )
चीन दुनिया के देशों मे शांति दूत की तरह काम कर रहा है तब चाहे ईरान – सऊदी के बीच शांति समझोता करना हो या फिर मक्का शांति समझोत करना हो। चीन कही न कही इस बात को समझता है की यदि अरब देशों मे शांति बनी रहेगी तो वह आसानी से तेल खरीद सकेगा व साथ ही अरब देशों के साथ व्यापर करके अच्छा लाभ कमा पाएगा।