Breaking News : एक ओर युद्ध “यमन का सऊदी अरब पर हमला”

हाल ही मे यमन के हुतियों का सऊदी अरब पर हमला हुआ है जिसमे 73 सऊदी अरब के नागरिकों के घायल होने की खबर है साथ ही सऊदी अरब ने जवाबी कार्यवाही करते हुए यमन के उन छेत्रों मे हमला किया है जहा हूती समुदाय बहुतायत मे रहते है। हूती और ईरान के बीच राजनीतिक तथा सैन्य संबंध हैं और ईरान पर हूतियों को हथियार, प्रशिक्षण तथा अन्य सहायता देने के आरोप लगते रहे हैं। ईरान इन आरोपों और अपने समर्थन की प्रकृति को लेकर अलग-अलग स्तरों पर प्रतिक्रिया देता रहा है। अभी कुछ समय पूर्व तीन मुस्लिम राष्ट्रों के बीच मक्का पैक्ट हुआ था जिसमे पाकिस्तान, तुर्की व सऊदी अरब शामिल है जब से हुतियों के द्वारा सऊदी अरब पर हमला किया गया है तब से किसी भी राष्ट्र की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। परंतु सऊदी अरब का एक बयान बाहर आता है जिसमे वो मानते है की हम यूरोप व अमेरिका से मिलकार हमला करेंगे। फिर प्रश्न उठता है की मक्का पैक्ट का क्या?

गल्फ के एक प्रमुख अखबार “अल जजीरा” ने भी सऊदी व यमन का जिक्र अपने ट्वीटर अकाउंट पर किया है

Taken from AL Jazeera English

हूती कौन हैं?

हूती यमन का एक राजनीतिक और सशस्त्र आंदोलन है, जिसे आम तौर पर अंसार अल्लाह (Ansar Allah) के नाम से भी जाना जाता है। इसका उदय उत्तरी यमन में हुआ और यह आंदोलन मुख्य रूप से जैदी शिया समुदाय से जुड़ा है।

2014 में हूती लड़ाकों ने यमन की राजधानी सना (Sanaa) पर कब्ज़ा कर लिया। इसके बाद यमन में राजनीतिक संकट और गृहयुद्ध और गहरा गया। 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन में सैन्य हस्तक्षेप किया, जिससे संघर्ष अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण बन गया।

हूती और लाल सागर

हूती आज केवल यमन के गृहयुद्ध के कारण ही नहीं, बल्कि लाल सागर (Red Sea) में उनकी सैन्य गतिविधियों के कारण भी अंतरराष्ट्रीय समाचारों में रहते हैं। हूती समूह ने इजरायल-हमास युद्ध के बाद लाल सागर और आसपास के समुद्री क्षेत्र में कई वाणिज्यिक जहाजों तथा सैन्य लक्ष्यों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं।

बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य (Bab el-Mandeb Strait) इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है। यहां तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।

क्यों महत्वपूर्ण है?

हूती मुद्दा यमन की राजनीति से आगे बढ़कर मध्य-पूर्व की क्षेत्रीय राजनीति, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक व्यापार से जुड़ चुका है। लाल सागर में तनाव के कारण जहाजों को कभी-कभी लंबा समुद्री मार्ग चुनना पड़ सकता है, जिससे यात्रा समय और परिवहन लागत बढ़ सकती है।

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